मौर्य साम्राज्य उदय और पतन : सम्राट अशोक का स्वर्ण काल .

मौर्य साम्राज्य के उदय और स्थापना का श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य और महान कूटनीतिज्ञ विष्णुगुप्त को जाता है . चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य ने प्राचीन भारत में322 ईसा० पूर्व से 187 ईसा० पूर्व तक प्रभुत्व कायम किया था. यह अपने समय के सबसे बड़े साम्राज्य में से एक बन गया था .चंद्रगुप्त मौर्य के साम्राज्य का विस्तार उत्तर- पश्चिम में हिंदकुश से लेकर दक्षिण में उत्तरी काटिक तक तथा पूर्व में मगध से लेकर पश्चिम में सौराष्ट्र तक था .


प्रतीकात्मक चित्र

इस वंस ने 137 सालों तक भारत पर राज्य किआ, जिसका श्रेय चंद्रगुप्त मौर्य और उनके मंत्री आचार्य चाणक्य को दिया जाता है. चंद्रगुप्त मौर्य की माता का नाम मुराया था ,शायद इन्हीं के नाम पर चंद्रगुप्त का नाम चंद्रगुप्त मौर्य पड़ा . इस साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी .

मौर्य साम्राज्य की स्थापना -

चंद्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और तेजी से पश्चिम की तरफ अपने साम्राज्य का विकास किया . उसने कई छोटे छोटे क्षेत्रीय राज्योंं के आपसी मतभेदों का फायदा उठाया ,जो सिकंदर के मरने के बाद पैदा हो गए थे .

मौर्य साम्राज्य के विस्तार में चंद्रगुप्त द्वारा सेल्युकस पर विजय ने अहम भूमिका निभाई थी .

सेल्यूकस युद्ध - 

सिकंदर की मृत्यु के पश्चात सेल्यूकस बेबीलोन का राजा बना . बैक्ट्रिया पर विजय के साथ उसके मन में सिकंदर के भारत विजय के अधूरे काम को पूरा करने की लालसा जाग उठी .
चंद्रगुप्त मौर्य ने 305 ईसा पूर्व यूनानी शासक सेल्यूकस ( सिकंदर का सेनापति था ) को युद्ध में पराजित किया और संधि स्वरूप सेल्यूकस की बेटी हेलेना का विवाह चंद्रगुप्त मौर्य से हुआ , जो कि प्रथम अन्तगराष्ट्रीय विवाह था .
सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त मौर्य को दहेज में 4 राज्य प्रदान किये . चंद्रगुप्त मौर्य ने एक मजबूत और कुशल केंद्र सरकार की नींव रखी. उनके बेहद सक्षम मंत्री आचार्य चाणक्य ने अपने खुफिया तंत्र की मदद से इसे हासिल करने में अहम भूमिका निभाई. चंद्रगुप्त मौर्य के बेटे बिंदुसार ने उन्हें सफल बनाया और 298-272 ईसा पूर्व से शासन किया . मध्य भारत पर विजय प्राप्त करके बिंदुसार ने मौर्य साम्राज्य का विस्तार जारी रखा .

बिंदुसार (298-272 ईसा पूर्व तक )-

बिंदुसार , चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र था जिसके पैदा होने से ही उसके मस्तक पर बिंदु था इसलिए उसका नाम बिंदुसार पड़ा .
बिंदुसार दक्षिण भारत की तरह अपने राज्य का विस्तार किया . आचार्य चाणक्य उसके समय में भी मंत्री थे . बिंदुसार को  " पिता का पुत्र और पुत्र का पिता " नाम से जाना जाता है क्योंंकि वह प्रसिद्ध व पराक्रमी शासक चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र एवं महान राजा अशोक के पिता थे .

सम्राट अशोक (273-232 ईसा पूर्व ) -

सम्राट अशोक मौर्य राजवंश के भारतीय सम्राट थे . सम्राट अशोक भारत के शक्तिशाली समर्द्ध साम्राज्य में से एक था . उन्होंने लगभग 41 सालों तक शासन किया . अशोक की पत्नी का नाम " असंधिमित्रा " था . जिसके कोई संतान नहीं थी , लेकिन अशोक को दूसरी पत्नी पदभावती से एक पुत्र था .
बौद्ध ग्रंथ के अनुसार बौद्ध होने से पूर्व उसे चंड अशोक कहा जाता था . शासनदेशों को शिलाओं पर खुदवाने वाला प्रथम भारतीय शासक अशोक ही था .अशोक ने 273 ईसा पूर्व ही सिंहासन प्राप्त कर लिया था , लेकिन 4 साल तक ग्रहयुद्ध में रहने के कारण अशोक को वास्तविक राज्यभिषेक 269 ईसा पूर्व में हुआ था . अशोक अपने 99 भाइयों को हरा कर राजा बना था .

अशोक के जीवन की महत्वपूर्ण घटना -

अशोक के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना कलिंग की विजय थी . यद्यपि वह एक खूनी कलिंग युद्ध के बाद अपने साम्राज्य का विस्तार करने में सक्षम था , लेकिन लोगों के रक्तपात और पीड़ाओ ने उसे युद्ध का त्याग करने और बौद्ध धर्म ग्रहण करने के लिए मजबूर किया. इसके बाद उसने  " धम्मा" द्वारा शासन करने का फैसला किया और शांति और अहिंसा का संदेश फैलाने के लिए मिशनरियों को भेजा . अधिकार सुनिश्चित करने के लिए उनके द्वारा एक शक्तिशाली और बड़ी सेना को बनाए रखा गया था . यूरोप और एशिया के राज्योंं के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का विस्तार किया गया . बौद्ध मिशन भी उनके द्वारा प्रयोजित थे . वह भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध सम्राटों में से एक बन गया .
जीवन के उत्तरार्ध में सम्राट अशोक भगवान बुद्ध की मानवता वादी शिक्षाओं से प्रभावित होकर बौद्ध हो गये और उन्हीं की स्मृति में उन्होंने कई स्तम्भ खड़े कर दिये जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थान -लुमिबनी में मायादेवी मंदिर के पास ,सारनाथ ,बोधगाया , कुशीनगर एंव आदी श्रीलंका ,थाईलैंड,चीन इन देशों में आज भी अशोक स्तम्भ के रुप में देखे जा सकते है .
सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा , श्रीलंका , अफगानिस्तान ,पश्चिम एशिया , मिस्र तथा यूनान में भी करवाया .
सम्राट अशोक अपने जीवन में एक भी युद्ध नहीं हारे . सम्राट अशोक ने ही समय में 23 विश्वविद्यालयों की स्थापना की गई जिसमे तक्षशिला ,नालंदा , विक्रमशिला, कंधार आदि विश्वविद्यालय प्रमुख थे . अशोक की मृत्यु के बाद मौर्य साम्राज्य के पतन में तेजी आ गयी थी. इसका स्पष्ट कारण कमजोर राजाओं का उत्तराधिकार था . एक और तत्कालीन और महत्वपूर्ण कारण मौर्य साम्राज्य का दो भागों में विभाजन होना था .

" अशोक की मृत्यु के बाद ही ,महान मौर्य साम्राज्य उखड़ने लगा "

मौर्य साम्राज्य के अन्य प्रमुख राजा -

कुणाल            -       263 ईसा पूर्व.

दशरथ मौर्य      -      232 से 224 ईसा पूर्व  .

सम्प्रति मौर्य      -     224-215 ईसा पूर्व .

शालिसुक मौर्य  -     215 से 202 ईसा पूर्व .

देववर्मन।         -      202 से 195 ईसा पूर्व.

शतधन्वन मौर्य -      195 से 187 ईसा पूर्व.

व्रहद्र्व मौर्य     -      187से 195 ईसा पूर्व .

मौर्य काल का महत्व -

मौर्य साम्राज्य की स्थापना के बाद भारतीय इतिहास में एक नए युग की शुरुआत हुई थी . वह इतिहास में पहला मौका था जिसमें पूरा भारत राजनीतिक तौर पर एकजुट रहा था . इसके अलावा , कालक्रम और स्रोतों में सटीकता की वजह से इस अवधि का इतिहास लेखन साफ सुथरा था . इसके साथ ही स्वदेशी और विदेशी साहित्यक स्रोत की पर्याप्त रुप में उपलब्ध थे . मौर्य साम्राज्य के साथ जुड़े कुछ महत्पूर्ण पुरातत्विक निष्कर्ष ,पत्थर की मूर्तियां थी जो अनूठी मौर्य कला का जबरदस्त उदाहरण थी .
अशोक के शिलालेखा पर मौजूद संदेश अधिकांश शासकों की तुलना में पूरी तरह से अलग थे जो अशोक के शक्तिशाली और मेहनती होने का प्रतीक थे .

मौर्य साम्राज्य की उपलब्धियांं -

यह मौर्य साम्राज्य के दौरान था कि दक्षिण एशिया में सैन्य सुरक्षा और राजनीतिक एकता ने एक -सामूहिक आर्थिक प्रणाली की अनुमति दी , जिसके परिणाम स्वरूप व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि हुई, कृषि उत्पादकता भी बढ़ी . एक अनुशासित केंंन्द्रीय प्राधिकरण था और किसानों को क्षेत्रीय राजाओं से फसल संग्रह बोझ और कर से मुक्त किया था . अर्थशास्त्र में वर्णित सिद्धान्तों द्वारा तैयार किया गया था . भारत भर में एकल मुद्रा प्रणाली चंद्रगुप्त मौर्य के समय ही स्थापित की गई थी .
देश में निर्यात में विदेशी खाघ पदार्थ , रेशम के सामान , मसाले और वस्त्र शामिल थे . पश्चिम एशिया और यूरोप के साथ प्रौद्योगिकी और विज्ञान ज्ञान के आदान प्रदान ने साम्राज्य को और  समृद्ध किया .
अस्पतालों ,सड़कों नहरों , विश्रामग्रहोंं , जलमार्गो और अन्य सार्वजानिक कार्योंं का निर्माण भी अशोक द्वारा प्रायोजित किया गया था .

मौर्य वंश के पतन के कारण -

प्रशासन का केंद्रीकरण ,मौर्य प्रशासन में सभी महत्वपूर्ण कार्य राजा के प्रत्यक्ष नियंत्रण में होते थे . उसे वरिष्ठ पदधिकारियों की नियुक्ति का सर्वोच्च अधिकार प्राप्त था . सामान्य नागरिक हमेशा राजा के नियंत्रण में रहता था . राज्य व्यक्ति के पारिवारिक जीवन में भी हस्तक्षेप करता था . ऐसी शासन व्यवस्था में यादि राजा अच्छा होता है तो प्रजा भी अच्छे से रहती है और यदि राजा अत्याचारी होता है तो प्रजा को भी कष्ट पहुंचता है.

करों की अधिकता -

मौर्य साम्राज्य में देश की आर्थिक स्थिति संकट ग्रस्त हो गयी . जिसके परिणाम स्वरूप शासकों ने अनावश्यक उपायों द्वारा करों धका संग्रह किया . उन्होंने अभिनेताओं तथा गणिकाओं तक पर कर लगाये . मौर्य साम्राज्य के पास एक अत्यंत विशाल सेना तथा अधिकारियों का बहुत बड़ा वर्ग था . इन सभी के लिए राजा वित्त की व्यवस्था जनता पर करारोपण करके करता था . 
मौर्य साम्राज्य ने जनता पर सभी प्रकार के कर लगाये .इन सभी करों से सामान्य जनता कि जीवन कष्टमय हो गया था .

अशोक की धार्मिक नीति -

अशोक की धार्मिक नीति का उसके साम्राज्य के ब्राह्मणोंं ने विरोध किया था ," चूंकि अशोक द्वारा पशु वध पर प्रतिबंध लगा दिया था जिससे ब्राह्मणोंं की आय बंद हो गयी थी . जिससे उन्हें उपहार के रुप में  विभिन्न प्रकार के बलिदानों के लिए पशु प्राप्त होते थे . ब्राह्मणोंं का लालच भी मौर्य साम्राज्य के पतन के कारणों में से एक प्रमुख कारण था .

मौर्य साम्राज्य के बारे में रोचक तथ्य -

  • सारनाथ में अशोक की राजधानी का शेर भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है .
  • लौह युग के दौरान मौर्य साम्राज्य का विकास हुआ और संपन्न हुआ .
  • कुछ मैत्री पूर्ण साम्राज्य जो मौर्य साम्राज्य से जुड़े नहीं थे , वे थे पांडय ,चेरस ,चोल...
  • मौर्य साम्राज्य को देश की पहली केंद्रीकृत शक्ति माना जाता था ,इसका प्रशासन वेहद कुशल था .
  • चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने साम्राज्य में एकल मुद्रा की एक प्रणाली स्थापित की थी .

इन्हें भी पढ़े -



Comments

Tranding Now

Best Discipline Quotes : अनुशासन पर अनमोल कथन .

Plato Best Quotes ; प्लेटो के उच्च विचार .

Leo Tolstoy Best Thoughts ; लियो टॉलस्टॉय( लेखक) के विचार .

Leonardo da Vinci Best Quotes ; महान चित्रकार लिओनार्दो दा विंची के अनमोल विचार .

डब्ल्यू. क्लेमेंट स्टोन के 20 अनमोल विचार ; W. Clement Stone 20 Best Quotes In Hindi

Aristotle Best Quotes ; अरस्तु के महान विचार .

महाभारत के दौरान दिए गए 22+ उपदेश और कथन; Mahabharat Quotes In Hindi.