हिंदी कहानी - भोंदू राम और जादुई चिड़िया.
हिंदी कहानी - भोंदू राम और जादुई चिड़िया.
मुख्य पात्र - भोंदू राम , भोंदू राम की पत्नी और साहूकार .
भोंदू राम आलसी है . वह किसी भी मिनट सो सकता है. नींद उसको सदा ही घेरे रहती है. उसकी इस आदत से उसकी पत्नी को भी चिढ़ है और उसके मां - बाप को भी . लेकिन है भोंदू राम ईमानदार , भला और मज़ेदार . इसलिए सभी उसको प्यार करते हैं. भोंदू राम चतुर और हाज़िर जवाब भी है और कोई भी समस्या सुलझा सकता है.
एक दिन भोंदू राम सोच में डूबा एक कुर्सी पर बैठा था . उसकी पत्नी ने सुबह पीने के लिए जो दिया था उसको भोंदू राम ने अब तक छुआ भी नहीं था. यह देख कर भोंदू राम की पत्नी को हैरानी हुई. " सुबह - सुबह तुम्हें भी औरों की तरह धान के खेत में काम करना चाहिए. तुम न जाने किस सोच में पड़े हो ? सचमुच , तुम्हारा व्यवहार बड़ा अजीब है . " उसकी पत्नी ने कहा .
जम्हाई लेकर भोंदू राम ने बेपरवाही से जवाब दिया , " मैं मुसीबत में हूं . इसलिए सोच में पड़ा हूं . "
" किस चीज़ की चिंता है ? गरीबी की ? तकलीफ़ में दिन गुजारने की आदत नहीं पड़ गई ? " पत्नी ने पूछा .
" मैं गरीबी की बात नहीं सोच रहा हूं." भोंदू राम ने कहा, " मैं साहूकार के बारे में सोच रहा हूं . याद नहीं , हमने उससे सात हज़ार रुपये लिए थे और अब तक वापस नहीं किये ? साहूकार दो बार आ चुका है रूपयों के लिए . आज वह फिर आएगा . पिछली बार उसने कहा था , अगली बार रूपए नहीं दिए तो तुम्हें कचहरी ले जाऊंगा ."
कचहरी का नाम सुनकर भोंदू राम की पत्नी डर गई . उसको रोना आ गया . " क्या कहा ? तुमको कचहरी में ले जाएगा ? तुमको सज़ा हो गई तो मेरा क्या होगा ? कचहरी मत जाना , हाथ जोड़ती हूं ."
" इसी कारण तो मैं इस समय इतना दुखी हूं ."
" लेकिन चिंता करने से कर्ज़ तो नहीं चुका पाओगे . अच्छा होगा कि जाकर रूपयों का कुछ इंतजाम करो ." पत्नी ने कहा .
" लेकिन कहां मिलेगा रूपया ? तुम्हारे कंजूस मां - बाप से ? वे तो देने से रहे . मुझे सोचने दो . परेशान मत करो . मैं कर्ज़ चुकाने की कोई तरकीब सोचता हूँ. तुम रसोई में जाओ. तुम यहां खड़ी रहोगी तो , मेरे सोचने में बाधा होगी."
भोंदू राम की पत्नी रसोई में वापस चली गई , और भोंदू राम फिर सोचने लगा . थोड़ी देर बाद वह ज़ोर से चिल्लाया और अपनी पत्नी को ढूंढ़ने रसोई में पहुंचा . वह बिल्कुल पागलों जैसा व्यवहार कर रहा था .
" सुनो ! मैंने बहुत बढ़िया तरकीब सोची है . खुशी मनाओ ! अब और चिंता मत करो. हम आज ही अपना कर्ज चुका सकते हैं" भोंदू राम ने कहा .
" क्या करोगे !" पत्नी ने पूछा .
" सवाल मत पूछो . शकरकंद के आटे से ढेर सारी लेई बनाओ. "
" क्या ? लेई बनाऊं ? "
" हां , हां . लेई! जल्दी . साहूकार के आने से पहले ."
भोंदू राम की पत्नी उबलते पानी में शकरकंद का आटा मिलाकर लेई बनाने लगी . इसी बीच भोंदू राम ने अपना एक तकिया खोल डाला और उसमें भरे चिड़िया के पंखों को ज़मीन पर बिखेर दिया.
" लो , लेई तैयार है . अब इसका क्या करूं ? " पत्नी ने आवाज दी . भोंदू राम ने हुक्म दिया , " ठंडी होने दो . ठंडी हो जाए तो मेरे सारे शरीर , सिर से पांव तक लेई चुपड़ दो ."
उसकी पत्नी ने वैसा ही किया , यद्यपि उसको समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था . लेई ठंडी हो गई तो उसने उसे भोंदू राम के पूरे शरीर पर चुपड़ दिया - उसके बालों की जड़ से लेकर पावों के नाखून तक . कोई भी हिस्सा बाकी नहीं रहा."
उसके बाद भोंदू राम जमीन पर बिखरे चिड़िया के परों पर लोट लगाने लगा . अब उसके सारे शरीर पर पंख चिपक गए . उसका चेहरा तक ढ़क गया . उसने पत्नी से कहा , " अब मैं बकरी के बाड़े में जाता हूँ. जब साहूकार आए तो उससे कहना कि मैं राजा के पास जादुई चिड़िया बेचने गया हूं ."
पत्नी ने सर हिला दिया . भोंदू राम बकरी के बाड़े में घुस गया . थोड़ी देर बाद ही साहूकार आ गया.
साहूकार ने पूछा , " भोंदू राम कहां है ? इस हफ्ते में यह तीसरी बार आया हूँ अपने पैसे लेने . आज आखिरी दिन है . अगर भोंदू राम ने कर्ज नहीं चुकाया तो मेरे पास कचहरी जाने के अलावा और कोई चारा नहीं ."
" लेकिन भोंदू राम तो घर पर नहीं है " भोंदू राम की पत्नी ने कहा . " तो वह घर में नहीं है ? गया कहां ? " साहूकार ने पूछा .
" वह जादू की चिड़िया के बारे में राजा से बात करने गए हैं. "
" क्या कहा ? जादू की चिड़िया ? "
" हां , भोंदू राम के पास जादू की चिड़िया है . उसे राजा खरीदना चाहते हैं." साहूकार सर हिलाकर मुस्कराया .
" अच्छा , अगर यह बात है तो मैं भी उस चिड़िया को देखना चाहूंगा . उसका पिंजड़ा कहां है ? "
" वह पिंजड़े में है . लेकिन उसको मत देखना . कहीं उड़ गई तो मुझ पर दोष लगाया जाएगा " पत्नी ने कहा .
उसको मना कर दिया गया तो साहूकार चिड़िया को देखने की और भी ज़िद करने लगा .
" मुझको क्यों नहीं देखने दे रही हो ? अगर पिंजड़े का दरवाज़ा बंद है तो चिड़िया कैसे उड़ा जाएगी ? चलो , दिखाओ जादू की चिड़िया . मैं सचमुच देखना चाहता हूं ." साहूकार ने खुशामद की."
" नहीं , नहीं मत देखना . भोंदू राम मुझसे बहुत नाराज होगा ."
लेकिन साहूकार और ज्यादा इंतज़ार नहीं कर सका . बाहर निकल कर इधर - उधर देखने लगा कि चिड़िया कहां है . वह बकरी के बाड़े की तरह से गुज़रा तो एक विचित्र जीव को देखकर चौंक पड़ा . उसने जल्दी से आगे बढ़कर बाड़े का दरवाजा खोल दिया. परों से ढका भोंदू राम जल्दी से बाहर निकला और गायब हो गया. भोंदू राम की पत्नी जोर -जोर से रोने और चिल्लाने लगी , " अरे , कोई मदद करो . जादू की चिड़िया भाग गई . भोंदू राम की चिड़िया गायब हो गई . हाय , मैं क्या करूं ? साहूकार , यह तुमने क्या किया ? मैंने तुमसे कहा था कि चिड़िया को मत देखो. अब वह उड़ गई. हाय ! "
" रोओ मत , रोओ मत , चुप हो जाओ." साहूकार उसको चुप कराने की कोशिश करने लगा . लेकिन पत्नी रोती ही जा रही थी .
" सर्वनाश ! अब राजा नाराज़ हो जाएगा . खैर ....मैं राजा को बता दूंगी कि साहूकार ने चिड़िया को छोड़ दिया " भोंदू राम की पत्नी बच्चों की तरह जोर - जोर से रोते हुए बोली.
राजा का नाम सुनते ही साहूकार घबरा गया . बोला , " राजा से मत कहना कि मैंने चिड़िया को बाहर निकाल दिया था . मैं माफी मांगता हूं मैने गलती की जो चिड़िया को बाहर निकलने दिया . हरजाने की तौर पर , मैं समझूंगा कि भोंदू राम का कर्ज़ चुक गया है . लेकिन , ईश्वर के लिए, राजा से मत कहना कि चिड़िया को मैने आज़ाद किया ." साहूकार गिड़गिड़ाया .
" राजा को मैं बता दूंगी . वह दस हज़ार रूपये में चिड़िया खरीदना चाहते थे. काफी ऊंचे दाम हैं ये ." भोंदू राम की पत्नी ने कहा.
साहूकार ने फौरन कहा , " अच्छी बात है . मैं तीन हज़ार और जोड़ दूंगा . भोंदू राम से मुझको सात हजार मिलने थे न ? तीन और मिलाकर पूरे दस हजार हो गए न ? उतना ही हुआ जितना राजा तुमको चिड़िया के लिए देते "
फिर साहूकार ने भोंदू राम की पत्नी को तीन हज़ार रूपए दिए . रूपए लेकर उसने रोना बंद कर दिया . साहूकार घर वापस चला गया .
भोंदू राम बाग में पेडों के झुरमुट में छिपा बैठा था . साहूकार के जाते ही वह बाहर निकला और घर के अंदर वापस आया .
उसकी पत्नी ने खुशी - खुशी कहा , " हमारा कर्ज़ चुक गया . ऊपर से तीन हजार रूपये का मुनाफा हुआ ." भोंदू राम जी खोल कर हंसा .
" मैं कितना भाग्यशाली हूं कि मेरी बीवी इतनी चतुर है . तुम और मैं मिलकर सारी दुनिया को बेवकूफ बना सकते हैं. "
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