लोहार की दुकान और पड़ोसी मंत्री परेशान - हिंदी कहानी .
1 - लोहार की दुकान और पड़ोसी मंत्री परेशान.
एक मंत्री के घर की दायीं ओर एक लोहार रहता था और बायीं ओर एक बढ़ई . दोनों दिन रात खटर - पटर करते रहते और मंत्री की शांति भंग करते . जब उससे और बर्दाश्त नहीं हुआ तो मंत्री ने दोनों को बुलाया और उनको घर बदलने को कहा .
एक दिन लोहार आया और बोला , " हुजूर , आप की आज्ञा के अनुसार मैं आज अपना घर बदल रहा हूं. "
कुछ देर बाद बढ़ई आया . उसने भी कहा , " हुजूर, मैं भी अपना घर बदल रहा हूं ."
मंत्री ने मन चैन की सांस ली . लेकिन ऊपर से इस बात पर बनावटी दुख प्रकट किया कि इतने अच्छे पड़ोसी चले जाएंगे . उसने उनको बढ़िया खाना खिलाकर विदा किया .
लेकिन हथौड़े और आरी चलाने की आवाज़ अभी भी बंद नहीं हुई . मंत्री को आश्चर्य भी हुआ और गुस्सा भी आया . उसने अपने नौकर को बुलाकर कहा , " पता लगाओ क्या बात है . "
नौकर यह समाचार लेकर लौटे कि बढ़ई और लोहार ने घर बदला ज़रूर था , लेकिन बढ़ई लोहार के घर में चला गया था और लोहार बढ़ई के घर में ! और दोनों मज़े में रात - दिन अपने हथौड़े और आरे चलाते रहे !.😊😊
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2 - किसान और तरबूज़.
एक किसान अपने गधे को हांकता हुआ एक तरबूज़ के खेत में पहुंचा . वह थका भी था और प्यासा भी . पास ही अखरोट के एक छायादार पेड़ के नीचे सुस्ताने लगा . तरबूज़ के लम्बे - चौड़े खेत के दृश्य का आनंद लेते हुए उसने ऊपर देखा . बहुत ऊंचे पेड़ की ऊंची शाखाओं में दो - चार अखरोट लटक रहे थे .ईश्वर का काम उसको समझ में नहीं आया .
उसने सोचा , इतने बड़े और मजबूत पेड़ पर इतने छोटे - छोटे अखरोट और इतने भारी तरबूज़ इतनी सपाट , नाजुक और हल्की बेल पर क्यों लगते हैं ? वह अभी सोच में डूबा ही था कि एक अखरोट नीचे गिरा और उसके सिर में लगा . उसने हाथ ऊपर उठाकर भगवान का धन्यवाद करते हुए कहा , " हे भगवान , तू भी बड़ा चतुर है जो बड़े तरबूजों को बड़े पेड़ पर नहीं लगाया .🤔🤔
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